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बहुत भरोसे का है अपना प्रेम प्रिये.....

Posted On: 2 Jun, 2014 Others,कविता,Hindi Sahitya में

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बहुत भरोसे का है अपना प्रेम प्रिये।
दिन तो दिन क्या ना कटती अब रैन प्रिये।
पल भर ना मिलता बिन तेरे चैन प्रिये।
ये तुमने बोले थे मुझसे बैन प्रिये।
बहुत भरोसे का है अपना प्रेम प्रिये।
फिर कहाँ रही निष्ठुरता और कहाँ से कटुता आयी।
क्यों दोपहरी मे छोड़ गयी ठन्डी पुरबाई।
तुम तो गंगा जैसी थी मै भी सागर सा बढ़ा चढ़ा।
ये प्रेम उसी रस्ते पर था जिसकी मिसाल बन ताज खड़ा।
कैसे तुमने रिश्ता तोड़ा तुम्हें कैसे मिलता चैन प्रिये।
बहुत भरोसे का है अपना प्रेम प्रिये।
छूके मुझको निकल गया ठन्डी पवनों का झोका।
मैं पीछे दौड़ा बो नही रुका तुम क्या जानो कितना रोका।
मैं चलता हूँ गरम रेत पर जलता हूँ परवाह नही।
उसे ठन्डा करते मेरे आँसू अब शीतल पवनों की चाह नही।
अब सो जाते है हँसते रोते नैन प्रिये।
बहुत भरोसे का है अपना प्रेम प्रिये।



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sanjeevtrivedi के द्वारा
June 7, 2014

धन्यवाद योगी जी…


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