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पगली लड़की के बिन जीना दुश्वार हुआ है....

Posted On: 22 Dec, 2013 कविता,Entertainment,Hindi Sahitya में

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पगली लड़की के बिन जीना दुश्वार हुआ है।
अब लगता है हमको उससे प्यार हुआ है।
अब रातें गुजर रही है उसकी यादों में।
दिन गुजरा करता है अब फरियादों मे।
डरता है मन बो हमसे दूर ना हो जाये।
सारे सपने मेरे कहीं चूर ना हो जायें।
उसकी गुस्सा भी अब हमको अच्छी लगती है।
तभी मोहब्बत हमको ये सच्ची लगती है।
मेरे लिये नीरस ये सारा संसार हुआ है।
पगली लड़की के बिन जीना दुश्वार हुआ है।
मै झगड़ा करता हूँ उससे छोटी छोटी बातों पर।
फिर बो भी लड़ लेती है मुझसे अपनी पिछली रातों पर।
फिर बात नही होती हम दोनो रोने लगते है।
मन मे चाहत के अंकुर बोने लगते है।
आखिर मे मुझको उसे मनाना पड़ता है।
पगली मै तेरा ही हूँ विश्वाश दिलाना पड़ता है।
फिर फूट फूट कर और तेज बो रोने लगती है।
जैसे मेरे पापों को बो धोने लगती है।
अब इस जीवन पर उसका अधिकार हुआ है।
पगली लड़की के बिन जीना दुश्वार हुआ है।
आज रात मे उसने मुझको जगा दिया है।
बात नही की मुझसे देखो दगा किया है।
ये आँखे और ये दिल दोनों उठ बैठे है।
ऐसा लगता है मानो लुट बैठे है।
बो पगली सो गयी अपनी याद दिला के।
अब ये दिल पगला कहता है उसका साथ दिला दे।
आज एक मेरा सपना साकार हुआ है।
पगली लड़की के बिन जीना दुश्वार हुआ है।
हमसे कहती है मेहनत से तुम पड़ते रहना।
अपने सपनों को मेरे संग यूँ ही गड़ते रहना।
जब मैं भी जीवन में कुछ बन जाऊँगी।
बादा करती हूँ तेरा साथ निभाऊँगी।
बादों कसमों पर अपना जोर नही चलता।
जीवन मे खुशियों का ही दौर नही चलता।
कभी वक्त के आगे झुकना पड़ता है।
आसमान में उड़ने बाले को भी रुकना पड़ता है।
एक झटके मे मेरी दुनिया बिखर गयी।
जब बो बोली देखो अब मै सुधर गयी।
मुझे नही पता था तुम इतना पीछे पड़ जाओगे।
मेरी खातिर दुनिया से लड़ जाओगे।
प्यार मोहब्बत ये सब तो नादानी है।
नही साथ रह सकते अपनी अलग कहानी है।
फिर ना जाने ये आँखें कितना रोयी थी।
पता नही कितनी राते ना सोयीं थी।
फिर समझ गया मै पगली उससे कहता था।
पर पागलपन खुद मै ही कर बैठा था।
बो जहाँ रहे अब खुशियाँ उसके साथ रहे।
उसके जीवन मे रंगो की बरसात रहे।



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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Madan Mohan saxena के द्वारा
December 24, 2013

अच्छा प्रयास .कुछ सुधार कि गुंजाईश है कभी इधर भी पधारें सादर मदन

sanjeevtrivedi के द्वारा
December 24, 2013

धन्यवाद मदन मोहन जी आपके सुझाव पर अमल होगा…..

Ashutosh Shukla के द्वारा
February 23, 2014

बहुत सुन्दर..

sanjeevtrivedi के द्वारा
February 23, 2014

आशुतोश जी मेरी कविता को समय देने के लिये धन्यवाद…संवाद बनाये रखियेगा……


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