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राहें अपनी अलग हो गयीं...

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ये आसमान मेरा भी है ये आसमान तेरा भी है
पर साथ नही उड़ सकते अब
दिशा हमारी अलग-अलग है।
ये धरती मेरी भी है ये धरती तेरी भी है
पर साथ नही चल सकते अब
राहें अपनी बदल गयीं है।
ये दुनिया मेरी भी है ये दुनिया तेरी भी है
हम साथ नही इस दुनिया में
दुनिया तेरी बदल गयी है।
ये प्रभात मेरा भी है ये प्रभात तेरा भी है
पर क्या मतलब अब इस प्रभात का
जब रातें अपनी अलग-अलग हैं।
ये बसंत मेरा भी है ये बसंत तेरा भी है
पर इस बसंत का अंत हो गया
पतझड़ से हम बिखर गये हैं।



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9 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

seemakanwal के द्वारा
November 24, 2013

सुन्दर रचना आभार .

sanjeevtrivedi के द्वारा
November 25, 2013

धन्यबाद…

DR. SHIKHA KAUSHIK के द्वारा
November 25, 2013

SUNDAR V SARTHAK PRASTUTI .AABHAR

nishamittal के द्वारा
November 26, 2013

नेगेटिव नहीं पॉजिटिव सोच रखिये सब अकछा होगा  

sanjeevtrivedi के द्वारा
November 26, 2013

धन्यवाद आपका आपने आपने समय दिया पर कभी-कभी जीवन मे बुरे दौर आते हैं…

sanjeevtrivedi के द्वारा
November 26, 2013

धन्यवाद आपने समय दिया…

Madan Mohan saxena के द्वारा
December 5, 2013

सुन्दर कबिता ,कभी इधर भी पधारें सादर मदन

sanjeevtrivedi के द्वारा
December 5, 2013

धन्यवाद आपका आगे भी आपका प्रोत्साहन मिलता रहे…

sanjeevtrivedi के द्वारा
December 5, 2013

धन्यवाद आपको आगे भी प्रोत्साहित करते रहियेगा…


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