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एक अधूरा प्यार.....

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तू कर गय़ी मुझसे एक अधूरा प्यार।
तूने लूट लिया एक और संसार।
सूरत पर तेरी कुछ नही लिखा था।
आँखो मे तेरी कुछ नही दिखा था।
वरना ये प्रेमजाल मुझको क्यूँ ग्रास बनाता।
काश पता होता मीठी बातों मे ना आता।
जीवन उत्साही था मेरे भी सपने थे।
माँ बाप बहन भाई मेरे भी अपने थे।
सब भुला दिया तेरे एक अधूरे प्यार ने।
काँटा समझ लिया मुझको मेरे परिवार ने।
मैं पागल एक टूटा तारा पकड़ रहा था।
एक दीवाना बाँहों मे छाया जकड़ रहा था।
सूरज चाँद सितारे सबने गीत मिलन के गाये थे।
जब पहली बार हमारे प्रीतम मिलने आये थे।
क्यूँ प्रीत शब्द की रीति बदल डाली।
प्रेम ग्रन्थ के पन्नों पर लिख दी गाली।
भोली भाली मासूम कली सी लगती थी।
फिर प्यार और व्यापार शब्द का कौसे संगम करती थी।
मजबूरी नही रही तेरी तूने मजबूर किया खुद को।
एक और चाँद की खातिर तारे से दूर किया खुद को।
मैं तारा नही चाँद ही हूँ सूरज सा चमकूगा।
तू बदल गयी अफसोस नही मै इतिहास बदल दूगा।



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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
April 1, 2014

आप अवश्य ही नया इतिहास रचेंगे संजीव ,इतनी कम उम्र में इतनी अच्छी कवितायें लिख कर ,विरह के मनोभावों को दर्शाती बहुत सुंदर रचना ,अनेक शुभ कामनाएं .

sanjeevtrivedi के द्वारा
April 2, 2014

nirmala ji पहले तो आपका धन्यवाद जो इस तुच्छ रचनाकार की कविता पर अपना कीमती समय व्यय किया आपका स्नेह मनोबल बढ़ाता है…


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