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तुम हो उजाला आँखो का....

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तुम हो उजाला आँखों का कैसे तुम खों दे हम।
तुम जो हँसो तो हँसते है तुम जो रोओ रो दे हम।
तुम हो उजाला आँखों का कैसे तुम खों दे हम।
तेरी बाते मेरी बाते तेरा गाना मेरा गाना।
कुछ तो बात गजब की है जो मैं हूँ तेरा दीबाना।
तारीफ तेरी तारीफ मेंरी तुझे सजा तो मुझे सजा।
मेंरा चन्दा सूरज तू है तू हँसती रहे बस मुझे मजा।
दिल में निशाँ हैं तेरे प्रेम के कैसे उनको धो दें हम।
तुम हो उजाला आँखों का कैसे तुम खों दे हम।
मेरी साँसे तेरी साँसे मेरी धड़कन तेरी धड़कन।
एक बार बुला कर तो देखो न्यौछाबर कर दूँ ये तन मन धन।
तेरे इश्क मे मेरा जीवन तेरी आँख मे मेरी कहानी।
ये खून भरा जो मेरे तन में तुझ पे बहा दूँ जैसे पानी।
भुला नही सकते तुमको चाहें जान भी अपनी दे दे हम।
तुम हो उजाला आँखों का कैसे तुम खों दे हम।
बो समय नही बो पल ही नही जब याद तुम्हारी आयी ना।
बिछड़ गयी हो तुम हमसे पर जान हमारी जाये ना।
इस रूठे मन को टूटे दिल को तुमसे यकीं है मिलने का।
इस परवाने का शौक है तेरी याद में पल पल जलने का।
जल जाऊँ पर राख कहेगी कब आओगे मेरे प्रियतम।
तुम हो उजाला आँखों का कैसे तुम खों दे हम।
तेरी आँखो का मुझे देखना मैं देखूँ तो झुक जाना।
याद आ रही तेरी सूरत जिसपे हुआ हूँ दीवाना।
क्यों दूर गयी तुम मुझे छोड़ गयीं तुम तुम्हें तरस क्यों आये ना।
दिल है तुम्हारा या पत्थर क्यों तुमको समझाये ना।
काश साथ में होते ना होते आँसू ना ये गम।
तुम हो उजाला आँखों का कैसे तुम खों दे हम।



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3 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sanjay kumar garg के द्वारा
October 11, 2013

संजीव जी, सादर नमन! किसी शायर ने कहा है-”कुछ तो मज़बूरी रही होगी, युही कोइ बेवफा नहीं होता” अच्छी कविता के लिए बधाई!

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
October 12, 2013

नई उम्र के नए तराने ये तेरे अफसाने हैं ! मात्रात्मक अनुशाशन पर ध्यान तो अति सुन्दर !! बधाई !

October 12, 2013

काश साथ में होते ना होते आँसू ना ये गम। तुम हो उजाला आँखों का कैसे तुम खों दे हम। सुन्दर अभिव्यक्ति .बधाई


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